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Bihar Weather News: बिहार में फिर सक्रिय हुआ मानसून, 28 जिलों में बारिश का अलर्ट; पटना में खतरे के निशान से ऊपर गंगा

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में मानसून सक्रिय, 28 जिलों में बारिश का अलर्ट, कई इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी और पटना में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर।

पटना, 22 अगस्त। मानसून की गतिविधियां तेज होने के साथ बिहार में एक बार फिर बारिश का दौर जोर पकड़ने लगा है। मौसम विभाग ने शनिवार को राज्य के 28 जिलों के लिए बारिश और खराब मौसम का अलर्ट जारी किया है। इनमें कई जिलों में भारी बारिश के साथ तेज हवा, मेघगर्जन और वज्रपात की आशंका जताई गई है। ताजा मौसम अपडेट के मुताबिक 10 जिलों में ऑरेंज अलर्ट और 18 जिलों में येलो अलर्ट है। मौसम विभाग ने अगले कई दिनों तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बारिश जारी रहने का अनुमान जताया है।

मौसम के सक्रिय होने से खासकर उत्तर-पश्चिमी, दक्षिण-पश्चिमी और सीमावर्ती इलाकों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। शनिवार को पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, अररिया और किशनगंज में भारी बारिश की संभावना बताई गई है। वहीं गोपालगंज, सीवान, सारण, भोजपुर, बक्सर, कैमूर और रोहतास समेत कई इलाकों में आंधी, गरज-चमक और वज्रपात का खतरा बना हुआ है।

पटना समेत मध्य बिहार के कई जिलों में भी मौसम का मिजाज बदलने की संभावना है। राजधानी में बादल छाए रहने के साथ बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों में बारिश की वजह से तापमान में राहत मिल सकती है। बीते दिनों पटना में अधिकतम तापमान 35.5 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया था।

28 जिलों में मौसम का अलर्ट

मौसम विभाग के शनिवार के अपडेट के अनुसार बिहार के 28 जिले अलग-अलग स्तर के मौसम अलर्ट के दायरे में हैं। ऑरेंज अलर्ट वाले क्षेत्रों में खराब मौसम के साथ तेज हवा और वज्रपात का खतरा ज्यादा है, जबकि येलो अलर्ट वाले जिलों में भी गरज-चमक, बारिश और तेज हवाओं को लेकर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

पटना, गया, नालंदा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, दरभंगा, सीतामढ़ी समेत कई जिलों में मौसम खराब रहने की संभावना जताई गई है। सीमांचल के अररिया और किशनगंज में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बारिश का यह सिलसिला अगले कई दिनों तक अलग-अलग हिस्सों में जारी रह सकता है। 22 से 26 अगस्त के बीच राज्य के विभिन्न जिलों में भारी बारिश के अलग-अलग दौर आने का अनुमान है। 23 अगस्त को कैमूर, रोहतास, बक्सर, गोपालगंज और सीवान में भारी बारिश की संभावना बताई गई है। इसके बाद 24 अगस्त को समस्तीपुर, सुपौल, वैशाली, बेगूसराय, खगड़िया, लखीसराय और नालंदा में भी भारी बारिश का पूर्वानुमान है।

गंगा के बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता

बारिश के बीच पटना में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने भी चिंता बढ़ा दी है। उपलब्ध ताजा रिपोर्ट के अनुसार गांधी घाट पर गंगा का पानी खतरे के निशान से करीब 20 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। गांधी घाट पर खतरे का निशान 48.60 मीटर बताया गया है, जबकि दीघा घाट पर यह स्तर 50.45 मीटर है।

उत्तराखंड और गंगा के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश का असर नदी के प्रवाह पर पड़ रहा है। ऐसे में बिहार के गंगा तटवर्ती इलाकों में जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों में भी राज्य की कई नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। 21 अगस्त को जारी विभागीय आंकड़ों में बागमती समेत कई नदियों के जलस्तर की स्थिति दर्ज की गई थी।

गंगा के बढ़ते पानी का असर घाटों पर रोजमर्रा के कामकाज पर भी पड़ रहा है। बेगूसराय के मुंगेर घाट में पानी बढ़ने से अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नदी किनारे रहने वाले लोगों और घाटों पर आने-जाने वालों को बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सावधानी बरतने की जरूरत है।

रोहतास में सबसे ज्यादा बारिश

पिछले 24 घंटे के दौरान राज्य के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक रोहतास में सबसे अधिक 41 मिलीमीटर बारिश हुई। इसके बाद किशनगंज में 26 मिलीमीटर, अररिया में 18 मिलीमीटर, गोपालगंज में 13 मिलीमीटर और समस्तीपुर में 6.2 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।

बारिश के कारण जहां तापमान में राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं निचले इलाकों में जलभराव की समस्या भी बढ़ सकती है। शहरी क्षेत्रों में तेज बारिश होने पर सड़कों पर पानी जमा होने और यातायात प्रभावित होने की आशंका रहती है। ग्रामीण इलाकों में खेतों में पानी जमा होने की स्थिति में किसानों को निकासी की व्यवस्था पर ध्यान देना होगा। मौसम विभाग ने भी भारी बारिश वाले इलाकों में सतर्क रहने की सलाह दी है।

41 फीसदी बारिश की कमी अब भी बरकरार

मानसून सक्रिय होने और कई जिलों में अच्छी बारिश होने के बावजूद बिहार अभी भी बारिश की कमी से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य में अब तक सामान्य से करीब 41 प्रतिशत कम बारिश हुई है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक 690.9 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, जबकि अब तक लगभग 410.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।

बारिश की इस कमी का असर खेती पर भी पड़ सकता है। हालांकि अगले कुछ दिनों में होने वाली बारिश से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर धान समेत खरीफ फसलों के लिए मानसून की सक्रियता महत्वपूर्ण है। वहीं बहुत अधिक बारिश होने पर खेतों में जलजमाव और फसल को नुकसान का खतरा भी पैदा हो सकता है।

आकाशीय बिजली से रहें सावधान

मौसम खराब होने के दौरान सबसे बड़ा खतरा आकाशीय बिजली का रहता है। ऐसे में लोगों को खुले मैदान, खेत, नदी या तालाब के आसपास अनावश्यक रूप से जाने से बचना चाहिए। बिजली चमकने और तेज गरज के दौरान पेड़ के नीचे खड़े होने से भी बचना जरूरी है। पक्के भवन के अंदर रहना अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है।

प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को भी नदी के जलस्तर और मौसम की स्थिति पर नजर रखने की जरूरत है। गंगा के किनारे रहने वाले लोगों के लिए बढ़ता जलस्तर विशेष रूप से चिंता का विषय है। आने वाले दिनों में बारिश और नदी के जलस्तर की स्थिति पर निर्भर करेगा कि तटवर्ती इलाकों में खतरा कितना बढ़ता है।

फिलहाल बिहार में मानसून की सक्रियता लोगों को गर्मी और उमस से राहत दे रही है, लेकिन भारी बारिश और गंगा के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन के सामने नई चुनौती भी खड़ी कर दी है। अगले चार-पांच दिन मौसम के लिहाज से राज्य के लिए महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।

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बारिश राहत भी, चुनौती भी

बिहार में मानसून की सक्रियता इस समय दोहरी तस्वीर पेश कर रही है। एक तरफ लंबे समय से बारिश की कमी झेल रहे राज्य के लिए अच्छी बारिश राहत लेकर आ सकती है। खेतों में पानी पहुंचेगा, तापमान नीचे आएगा और किसानों को खरीफ फसलों के लिए जरूरी नमी मिल सकती है। दूसरी तरफ कम समय में बहुत ज्यादा बारिश होने पर शहरी जलजमाव, ग्रामीण इलाकों में जलभराव और नदियों के बढ़ते जलस्तर जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

पटना में गंगा का खतरे के निशान से ऊपर पहुंचना इस बात का संकेत है कि मौसम को केवल बारिश के नजरिए से देखने के बजाय नदी और बाढ़ की स्थिति को भी साथ में देखना होगा। तटवर्ती इलाकों में प्रशासन को निगरानी बढ़ानी चाहिए और लोगों तक समय पर सूचना पहुंचानी चाहिए। खासकर उन इलाकों में सतर्कता जरूरी है जहां नदी का पानी तेजी से बढ़ रहा है।

आम लोगों की भी जिम्मेदारी है कि मौसम विभाग के अलर्ट को गंभीरता से लें। आंधी और वज्रपात के दौरान खुले स्थानों से दूर रहें तथा नदी और जलभराव वाले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचें। बिहार को इस समय ऐसी बारिश की जरूरत है जो बारिश की कमी दूर करे, लेकिन बाढ़ और जलजमाव की नई समस्या न खड़ी करे।

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